उस दिन मैं निर्वस्त्र उतर जाउंगी नदी में

ब्रांडेड क्रेच, ब्रांडेड प्रेम और ब्रांडेड वृद्धाश्रम

एक दोस्त के नाम लिखा गया ख़त जो हम सबको पढ़ना चाहिए

‘और मैं भी मेरा रंग के रंग में रंग गई’

हर आजाद फैसले की कीमत चुकानी पड़ती है…

मैंने एक लड़की को धीरे-धीरे मरते हुए देखा

मगर आज भी ये आलम है और ये हो न सका…

ना जाने कहां गायब हो गया वो अल्ह‍ड़पन, मैं अब मैं नहीं रही

भाई… ये एक दिन की श्रद्धा बहुत भारी पड़ती है हम पर!