Monthly Archive: December 2016

प्रेगनेंसी, बाजार और दया

एक भाभी जब गर्भवती हुई, तब पूरे गर्भकाल आठवे महीने तक तैराकी, साइक्लिंग, ट्रेकिंग पर जाना करती थी । जब भतीजी पैदा हुई तो दर्द हुआ केवल 10 मिनट और डॉक्टर तक पहुंचने से...

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विकास के दावों पर थप्पड़ हैं भारत के ये रेड लाइट एरिया

भारत का नाम संस्कृति, सभ्यता और महिलाओ के सम्मान के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। जहाँ पर महिलाओ को देवी के रूप में पूजा जाता है। भारत में सभ्यता और संस्कृति के...

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रूमानियत नहीं दोस्ताने की जरूरत है स्त्री पुरुष संबंधों में

सिमोन ने ही नहीं महादेवी वर्मा ने भी दबे स्वर मे यह बात कही है कि हमारे समाज की आंतरिक बनावट जिस तरह की रही है ,वहाँ स्त्री-पुरुष के बीच परस्पर प्रेम नहीं हो...

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आपने क्या सोचा कि मैं मर जाऊंगी?

कुछ साल पहले सीमा बिस्वास का एक नाटक देखने को मिला था। रबीन्द्रनाथ रचित स्त्री पात्र केंद्रित नाटक ‘स्त्रीर पत्र‘ समाज में स्त्रियों की दयनीय स्थिति को बयां कर रहा था। एक स्त्री के...

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यौन शिक्षाः आप बात करके देखिये तो, सब आसान हो जाता है

चलिये, आज एक जरूरी बात करते हैं। मां के रूप में स्त्री की भूमिका के हर पहलू पर बात होती है, परन्तु जैसे जैसे तेजी से समय बदल रहा है और बच्चे प्री-टीन में ...

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खिड़की, आर-पार की (लघु कथा)

आज फिर चार बजे बाहर गैलरी में बनी खिड़की के पास कुर्सी बिछाकर बैठ गई। यह क्रम पिछले दो साल से अनवरत चल रहा। करूँ भी तो क्या? सुबह के काम की भागदौड़ और...

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दोस्ती, जीवन भर के लिए…

एक लोक कलाकार और एक आर्स्टिस्ट की अनोखी प्रेम कहानी मेरा नाम अज्ञेश है। मैं छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव से हूं। पढ़ाई बस पांचवीं तक हुई है। पिता देवीलाल नाग छत्तीसगढ़ी नाचा लोकनृत्य करते...

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क्योंकि तुम बेटे हो…

गीता यथार्थ विभिन्न मुद्दों पर अपनी बेबाक शैली में लेखन के लिए सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं।  हमने चुनी थी उनकी फेसबुक वॉल से ली गई एक बेहद संवेदनशील चिट्ठी, जो उन्होंने अपने...

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एक लड़का जिसके लिए पीरियड्स पर बात करना झिझक का विषय नहीं

मेरा रंग के इस एपिसोड में मिलिए बंटी त्रिपाठी से, जो एक पुरुष होने के बावजूद पीरियड्स पर सोशल टैबू को खत्म करने में प्रयासरत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे पर झिझक...

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