Monthly Archive: January 2017

ब्रा, पैंटी बोलने से नाटक रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर प्रतिरोध

“इसने मेरी ब्रा उठाके उनकी बालकनी में फेंक दी और उसपे शायरी भी लिख दी।” यह था डीयू के कमला नेहरू कॉलेज के नाटक ‘शाहिरा के नाम’ का वह डायलाग जिस पर हुई कंट्रोवर्सी...

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कृपया स्त्री के शरीर को रहस्य न बनाएं…

टीवी पर सेनेटरी नैपकिन का विज्ञापन आ रहा है और घर का प्रत्येक वयस्क सदस्य बगलें झाँक रहा है… बच्चे उत्सुकता से देख रहे हैं…। यह कोई नई बात नहीं है। जब से टीवी...

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लड़कियां शर्म छोड़ खुलकर बोलें छेड़खानी के खिलाफ

इलाहाबाद की एक छात्रा लोकल बस से सफर कर रही थी। हवा के ठंडे झोकों ने उसे नींद के आगोश में ढकेल दिया। ऐसा हम सबके साथ होता है। मैं स्वयं गाड़ी के भीतर बैठते...

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थर्ड जेंडर से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं

जब कभी किसी के परिवार में कोई खुशी का अवसर होता है, तो हम देखते हैं कि एक लैंगिक दृष्टि से विवादित समाज के लोग जो प्रायः हिजड़े (अथवा वर्तमान में प्रचलित नाम किन्नर;...

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ओके जानूँ – प्यार में आदत पड़ जाती है एक-दूसरे की

आज जब हम शादी जैसे बंधन से बचना चाह रहे हैं वहीं ओके जानूँ फिल्म में शादी को रिश्ता न टूटने की एक मजबूत कड़ी माना गया है। फिल्म यह दिखाती है कि आदि...

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हँसने का यह मतलब नहीं कि हमारे साथ बदतमीजी की जाए!

बैंगलोर में हुई शर्मनाक घटना का कलंक हमारी सोसाइटी से शायद इतनी जल्दी न मिटे, मगर यह भी सच है कि धीरे-धीरे करके लोग उसे भूल ही जाएंगे। मगर जब भी हम इसे याद...

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हां, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं !

हां मुझे भी चरित्रहीन औरतें पसंद हैं… बेहद… बेहद.. खूबसूरत होतीं है वो। बेबाक, बेपर्दा, स्वतंत्र और उनमुक्त… कि उनका कोई चरित्र नहीं होता। केवल चरित्रहीन औरतें ही खूबसूरत होती हैं। पिजरे में कैद...

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कामसूत्र, नटराज सिनेमा और हम लड़कियां

मीरा नायर की कामसूत्र बनारस के नटराज सिनेमा हाॅल में लगी थी। मैं और मेरी कुछ सहेलियाँ फिल्म देखना चाहते थे । यह बात है 1997 की। कामसूत्र फिल्म बनारस के किसी टॉकीज़ में...

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लड़कियों.. कुछ सवाल अपने पुरूष रिश्तेदारों से पूछो!

लड़की हो तन ढक कर रखो… लड़की हो नजरें नीची रख कर चलो… लड़की हो चौका-बरतन और सिलाई-कढ़ाई सीख लो…. लड़की हो बुजुर्गों के सामने सर ढक कर रखो ये करो वो करो और...

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