निहलानी जी, फीमेल फैंटेसी से इतनी घबराहट क्यों हुई आपको?

पहलाज निहलानी जी, 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' फिल्म को मुंबई फिल्म फ़ेस्टिवल में जेंडर इक्वेलिटी के लिए 'ऑक्सफेम' अवार्ड मिल चुका है। यानी कि...

हर पुरुष के भीतर एक स्त्री होती हैः अविनाश

पत्रकार अविनाश दास ने फिल्म 'अनारकली ऑफ आरा' में एक ऐसी स्त्री को अपने स्वाभिमान के लिए संघर्ष करते दिखाया गया है, जो नाचने-गाने...

हर महिला को जाननी चाहिए कोयंबटूर के मुरुगनाथम की कहानी

एसी नील्सन का एक सर्वे बताता है कि भारत में सिर्फ 12% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का प्रयोग करती हैं। ऐसा जागरुकता के अभाव...

मुझको यौम-ए-मुहब्बत जैसे किसी दिन की याद नहीं

आज वैलेंटाइन डे है। मोहब्बत के इज़हार का दिन। अपना मुल्क अफ़ग़ानिस्तान छोड़ा तो उम्र काफ़ी कम थी। यौम-ए-मुहब्बत जैसे किसी दिन की याद...

देह जो नदी बन चुकी…

एक लंबी कविता... जो रेड लाइट एरिया की बेबस और बदरंग जिंदगी को बयान करती  है।  (1) भूख से बेदम, किसी सड़क ने पिघलते...