दो घटनाएं और पोर्न की दुनिया से रू-ब-रू होना

बात पुरानी है, नई है, अपने समय में हर समय की है। सड़कें आमतौर पर किसी भी शहर का आईना होती हैं। जिन पर टहलते हुए उस समाज की नब्ज़…Continue Reading →

कई धारणाएँ तोड़ते हैं ‘पतनशील पत्नियों के ये नोट्स’

हिन्दी साहित्य में फेमिनिज्म या स्त्रीवाद को बेहद गुस्सैल, आक्रामक और रुखे अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है। नीलिमा चौहान की किताब पतनशील पत्नियों के नोट्स सबसे पहले इसी प्रचलित…Continue Reading →

बस्ती में गई तो थी महिला दिवस पर बात करने, बात कहीं और पहुंच गई…

आठ मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। एक हफ्ते पहले से इसकी तैयारियां चल रही हैं और जगह जगह कार्यक्रम हो रहे हैं। गौर करने वाली बात ये है…Continue Reading →