चरित्रहीन

Love painting

जब पहली बार तुमने मुझे
बीस मिनट तक चूमा
और उस बेहतरीन फ्रेंच किस के बाद
तुमने हँस कर कहा कि तुम तो
मुझसे भी अच्छी तरह किस करती हो
मैंने यह सुनकर दी थी तुम्हें
एक तिरछी स्माइल
जैसे मै तो बड़ी एक्सपर्ट रही हूं

और फिर उस शाम जब मैंने कहा
कि मैं नही पीती शराब
और तुमने कहा कि नाक बंद करो
और एक सिप में पी लो
किसी कड़वी दवाई की तरह
फिर मेरे न मानने पर
तुमने जिद-जिद में लगाई थी शर्त
कि कौन अपना पैग पहले खत्म करता है
फिर हारकर मैंने मान ली तुम्हारी बात
और मुझसे हारने पर तुमने हँस कर कहा
कि तुम तो लगती हो बड़ी दारूखोर

फिर वैलेंटाइन डे की उस रात
जब तुमने जिद की कि
आज यहीं रुक जाओ मेरे पास
और मैने भी प्रेम में बेसुध
मान ली तुम्हारी बात
हालाँकि उससे पहले कई बार
मैं कर चुकी थी इन्कार

जब हज़ार इन्कार के बाद भी
तुम्हारी छटपटाहट को देखकर
मैने लांघी थी वो पवित्रता वाली रेखा
और आवारा होकर हमने किया था सेक्स
उसके बाद अगली सुबह तुमने
मेरा माथा चूमकर कहा था
कि तुम्हारे जैसी कोई नही

पिछले हफ्ते ब्रेकअप के बाद
जब मैं भिगो रही थी अपना तकिया
तब सुनने में आया कि हमारी ये अंतरंग बातें
अब हो चुकी हैं सरेआम
और तुमने साबित कर दिया है
इन सब बातों की बुनियाद पर मुझे
…’चरित्रहीन’

  • यह कविता है एकता नाहर की। कंप्यूटर साइंस में बीई कर चुकी एकता फिलहाल पत्रकारिता और लेखन में सक्रिय हैं। दैनिक भास्कर और पत्रिका न्यूज में काम कर चुकी हैं। भोपाल में रहती हैं। 
एक वैकल्पिक मीडिया जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है। जो स्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।
इसे भी देखेंः  मुझको यौम-ए-मुहब्बत जैसे किसी दिन की याद नहीं

2 thoughts on “चरित्रहीन”

  1. मेरी आँखों मे आंसू आ गए,
    जो कि यूँ ही नही आते ,
    कुछ पंक्तिया ऐसे लगी
    जैसे किसी ने मेरी व्यथा लिख दी हो

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