खुद को छिपाने के लिए मैंने बाहर निकलना बंद कर दिया था…

मेरा रंग पर हम शेयर कर रहे हैं दीपिका चौहान की एक फेसबुक पोस्ट, जिसमें दीपिका ने अपनी निजी जीवन का एक  बहुत ही दुखद हिस्सा साझा किया है। साथ ही उन्होंने बड़ी हिम्मत दिखाई है क्योंकि भारतीय समाज में आज भी इस तरह खुलकर अपनी बात रखना आसान नहीं है। दीपिका पहली लड़की नहीं हैं जिनके साथ ऐसा हुआ है। ऐसी और भी लड़कियाँ हैं पर इस तरह लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाई होंगी। यह पोस्ट बहुत सी लड़कियों का हौसला बढ़ाएगी। मेरा रंग उनके इस हौसले को सलाम करता है। 

ये पोस्ट खासकर मेरी उन फेसबुक बहनों के लिए है जिनको शिकायत रहती है कि मैं अपनी पूरी फोटो डीपी में क्यों नहीं लगाती, अपने व्यक्तिगत जीवन का बहुत ही दुखद हिस्सा साझा कर रही हूं अगर मन हो तो एक बार पढ़ लें…

पता नहीं उसको किस रिश्ते में परिभाषित करूं, अगर सिर्फ प्रेमी कहूं तो मेरी भावनाओं के लिहाज से थोड़ा छोटा शब्द है, उसको पूर्ण रूप से पति भी नहीं कह सकती क्योंकि उसने ये हक भी बाद में पूरी तरह से छीन लिया था लेकिन वो जो भी था उसके लिए मैं तन-मन-धन हर तरह से समर्पित थी। मेरीे जिंदगी का वो एक बहुत खूबसूरत दिन था जब बीटीएम लेआउट बैंगलोर में मैंने उसके जन्मदिन पर आधीरात को अचानक से एक नयी पल्सर बाइक की चाबी सौंपी थी और वो खुशी से झूम उठा था।

मेरी जिंदगी में माता-पिता के अलावा उससे बड़ा कोई नहीं था, अचानक से उसको कैलीफोर्निया जाना पड़ा, मैं बहुत खुश थी इसलिए शादी के लिए जिद्द की मगर उसने एक-दो साल का और समय मांगा, तीन महीने बाद मुझे भी कंपनी की तरफ से न्यूयॉर्क जाने का प्रपोजल मिला जब उसको बताया तो उसने तुरंत ही मना किया और फालतू वाले तर्क दे कर गुस्सा हो रहा था, यह हमारे पास एक साथ रहने का बहुत अच्छा मौका था लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ कि खुश होने की बजाय वो नाराज हो रहा था हालांकि मैं मान गई और व्यक्तिगत कारण बता कर मैनेजमेंट को मना कर दिया, लेकिन शादी को लेकर हमारे बीच अक्सर मन-मुटाव जारी रहा.

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अचानक से उसके एक दोस्त का मैसेज आया कि प्यार, समर्पण होना अच्छी बात है मगर इतना ज्यादा नहीं होना चाहिए कि दुनिया में कुछ और दिखाई ही न दे, जब मैंने डिटेल में पूछा तो उसके दोस्त ने कुछ वीडियो, फोटो और उसकी पर्सनल चैट का स्क्रीनशॉट भेजा, फिर तो ऐसा लगा कि मिट्टी की मूर्ति से कोई सैलाब गुजर रहा हो…

लांस वेगास सिटी में शराब में डूबी रूस और यूक्रेन की वेश्याओं के साथ उसकी नंगी नंगी तस्वीरें और विडियो ने मुझे अचानक मौत से भी बड़ी सजा दे दी, चैट के स्क्रीनशॉट्स से पता चला कि मेरे भगवान ने 22 लाख रुपए नगद दहेज और एक सफारी कार के बदले में घर वालों की मर्जी से कानपुर में शादी के लिए हां कर दी है।

मैंने सोचा कि अक्सर लोग संगत में भटक जाते हैं शायद उसके साथ भी यही हुआ होगा, उसको शुरू से ही सिगरेट और शराब की लत थी साथ ही साथ वो बैंगलौर में भी अक्सर किसी न किसी लड़की को किसी दूसरे की दोस्त बता कर मेरी गिफ्ट की गई बाइक में घूमाया करता था, मुझे यह बात अच्छी नहीं लगती थी लेकिन मैं ये मानकर चुप हो जाती थी कि शायद मेरी सोच गलत है और शादी के बाद उसको मैं किसी और के पीछे भागने की जरूरत महसूस नहीं होने दूंगी और उसको अपने अनुसार ढाल लूंगी।

इतना सब कुछ होने के बाद भी मैंने दिल पर पत्थर रखा और फिर से बात करने की कोशिश की मगर पहला जवाब ये मिला कि उसके घर वाले बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं कि उनके घर में ऐसी बहू आये जो पहले से ही उनके बेटे के साथ बिस्तर साझा कर रही हो, दूसरा जवाब ये मिला कि हमारी दोनों की कुछ फोटो और वीडियो किसी ने पोर्न वेबसाइट्स पर अपलोड कर दिए हैं, शादी होने से उसके पूरे खानदान की इज्जत मिट्टी में मिल जायेगी, तीसरा जवाब ये था कि हम इंटरकास्ट थे इसलिए शादी करने से उसके ब्लाकप्रमुख पिता जी और ग्राम-प्रधान माता जी की राजनीतिक छवि को बहुत नुकसान पहुंचेगा।

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प्राइवेट कंन्टेट लीक कर के उसने मेरे वर्तमान के साथ साथ मेरे भविष्य में भी आग लगा दी थी, मेरे पास उससे कहने को कुछ खास नहीं था, अंतिम बार मैंने उससे बस इतना ही कहा था कि मैंने तुम्हें अपना भगवान माना है, तुम्हारे लिए व्रत रखे हैं, अगर शैतान बनने की कोशिश करोगे तो भागवान तुम्हें बहुत बड़ी सजा देगा। उसने मुझे जिंदा लाश बना दिया था।

खुद को छिपाने के लिए मैंने बाहर निकलना बंद कर दिया, हर किसी की नजर से मुझे डर लगने लगा, आफिस में मैंने लोगों से बात करना बंद कर दिया, कई बार सुसाइड करने की सोची मगर मेरे मासूम विकलांग-रिटायर फौजी पिता, मेरी प्यारी सी मां और इकलौते छोटे भाई के मोह ने रोक लिया, मैंने हिम्मत जुटा कर के लाइफ कांसुलर और मनोचिकित्सक के पास जाना शुरू कर दिया।

एक महीने बाद क्रिसमस की छुट्टियों में वापस वो इंडिया आया था तभी एक दिन जानकारी मिली कि कोहरे की वजह से लखनऊ के पास उसका एक्सीडेंट हो गया है और वो कोमा में है। थोड़ा सा शांति जरूर मिली लेकिन बहुत ज्यादा उलझन हो रही थी, मुझसे नहीं रहा गया और मैं शुक्रवार की शाम फ्लाइट पकड़कर लखनऊ पीजीआई हास्पिटल देखने पहुंच गई। ऊपर वाले ने शायद अंदर से मुझे बहुत कमजोर बनाया है, उसको वेंटिलेटर पर देखकर मेरी आत्मा पिघल गयी, मैं बहुत रोई, सब से जिद कर के उसको एक बार छूने गई, उसके घर वालों के ताने सुनने को मिल रहे थे मगर उसके कुछ दोस्तों ने मुझे संभाला।

पता नहीं भगवान मुझे किन कर्मों की सजा दे रहा था, उसकी रोती हुई मां और बहनों को देखकर मैं ग्लानि महसूस कर रही थी कि शायद ये सब मेरी बद्दुआओं की वजह से हुआ है भावुक होकर रोते हुए मैंने भगवान से यही प्रार्थना की कि उसको किसी तरह फिर से उसके पैरों पर खड़ा कर दें अगर हो सके तो उसकी गलतियों की बाकी सजा मुझे मिल जाये।अगले दिन सुबह रिटर्निंग फ्लाइट पकड़कर मैं बैंगलोर वापस आ गई, एक महीने बाद उसके दोस्त ने फोन करके बताया कि अब वो इस दुनिया में नहीं रहा।

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आज भी उसकी यादों के साथ हमारे वीडियो और तस्वीरें पोर्न वेबसाइट्स पर पड़ी हैं… कई बार रिक्वेस्ट कर के डिलीट करवाया लेकिन कोई न कोई फिर से अपलोड कर देता है, यही वजह है कि मैं अपनी तस्वीरें किसी और के साथ साझा करने में हिचकिचाती हूं और अभी भी लोगों से दूर भागती हूं।

उसने मेरी भावनाओं की कद्र नहीं की, इस बात पर मुझे बहुत दुःख होता है और गुस्सा भी आता है। मेरी जिंदगी का हर एक छोटा सा फैसला यहां तक कि मेरी दिनचर्या भी उसके अनुसार चलती थी, उसी के लिए सजना-संवरना अच्छा लगता था, उसी के लिए फोटो खिंचवाना पसंद था, उसी से शादी का सपना देखा था, उसी के बच्चों की मां बनना चाहती थी जो सिर्फ एक सपना बनकर रह गया।

वो मुझे ऐसे हालात में छोड़ कर गया है कि अब मेरे अतीत को स्वीकार कर मुझे कोई स्वीकार नहीं करेगा, मैं अपने अतीत को छिपा कर फिर से किसी की होना नहीं चाहती, और न ही रिश्तों के बदले में किसी का एहसान और सहानुभूति चाहती हूं, अब इस जन्म में तो वो मुझे नहीं मिलेगा इसलिए सोच रही हूं कि अगले जन्म तक उसका इंतज़ार ही कर लेती हूं। बेबस होने की वजह से मैं उसकी जिंदगी नहीं बचा सकी इसलिए अगर सब कुछ सामान्य रहा तो बाद में बनारस में अनाथालय खोल कर कुछ लोगों की जिंदगी सुधारने की कोशिश जरुर करुंगी।

  • दीपिका चौहान इंजीनियर हैं और बंगलुरू में रहती हैं। यह पोस्ट हमने उनकी अनुमति से उनकी फेसबुक वॉल से ली है।
एक वैकल्पिक मीडिया जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है। जो स्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।

4 thoughts on “खुद को छिपाने के लिए मैंने बाहर निकलना बंद कर दिया था…”

  1. आज के युग मे चाहत को प्रेम का नाम दे दिया जाता है।अपनी भूख के आगे सामाजिक मान्यताओं को तोड़ दिया जाता है।फिर यही सब होता है और बाद में पछताने के सिवा कुछ नहीं मिलता

  2. ओह्ह पढ़कर मन भर आया ।लेकिन अब बहुत ज़रूरी हो गया है की आने वाले कल में ऐसे घटनाएं दोबारा न हो इसके लिए क्या कदम उठाये जाए इस पर काम करना बहुत ज़रूरी है ।
    सबसे पहले अगर बच्चे शादी जैसे फैसले खुद लेने जा रहे है तो घरवालो को पहले से बताना बहुत ज़रूरी है अन्यथा दोनों में कोई जिसे शादी से मुकरना होता है वो घर वालो का नाम लेकर मुकर जाता है और हालात ख़राब हो जाते किसी का भी मानसिक दवाब नहीं रहता

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