‘लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का’ में ये कैसा महिला सशक्तिकरण है?

Lipstick Under My Burkha Review

कल रात एक मूवी देखी यू ट्यूब पर – लिपस्टिक अंडर माय बुरका।  काफी नाम सुना था फ़िल्म का… कि ये महिला सशक्तिकरण पर है, क्या शानदार फिल्म है, अवार्डेड है,,, वगैरह वगैरह…

पर मुझे समझ नही आया डाइरेक्टर या कहानीकार ने किस टाइप का महिला सशक्तिकरण दिखाया है। फिल्म में चार महिलाएँ हैं, जिसके चारो ओर यह फिल्म घूमती है। एक अपने लड़कपन में है, एक जवान, एक अधेड़ है और एक बुजुर्ग…

चारों की कहानी एक जगह आ कर रुक जाती है… सेक्स पर।

लड़कपन में जो लड़की है अमीरों वाला बेपरवाह लाइफस्टाइल जीना चाहती है। मॉल में चोरी कर कपड़े पहन आ जाती है। पकड़ी नही जाती फिर अमीर दोस्तों में शामिल होने की दौड़ के अधिकार के नारे लगाती है, सिगरेट पीती है, चोरी से पब जाती है, किसी और के बॉयफ्रेंड के साथ होती है। जिसका वो बॉयफ्रेंड है वो लड़की प्रेगनेंट है और अपना अबोर्शन करवाती है।

अब दूसरी जो जवान है, वो एक लड़के से प्यार करती है। लड़का बस दिन-रात उससे सेक्स करता है। उसकी सगाई हो या कोई मौका और दूल्हा स्टेज पर वेट कर रहा है वो स्टोर रूम में फोटोग्राफर बॉयफ्रेंड के साथ बिजी हो जाती है। पकड़ी भी जाती है। लड़का कहीं से नही लगता कि उसे प्यार करता है। आखिर में वो जो होने वाला पति है उस के साथ खुश रहने की कोशिश करती है पर अपने प्रेमी को नही भूल पाती। कहीं न कहीं लड़की को शारीरिक वासना से ग्रस्त दिखा दिया गया है।

तीसरा किरदार जो अधेड़ है… लगभग हमारी उम्र की। बाल-बच्चों वाली… वो ऊब चुकी है सेक्स से। जो कि हर महिला की मानसिकता सी बन जाती है एक खास वक़्त में। खासकर गृहस्थी की भागदौड़ में फंसी स्त्रियों की… और पति किसी दूसरे के साथ अफेयर में हैं। वह देख लेती है फिर भी विरोध नही कर पाती और न जबरन बनाए जा रहे शारीरिक संबंधों का विरोध कर पाती है।

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चौथी जो बुजुर्ग है वो अपने पोते को स्विंमिंग सिखाने ले जाती है। कोच उसे भी कहता है की आपको सीखनी चाहिए और उसमें दबी इच्छा जगती है। मॉल जाती है। शरमाते हुए स्विम सूट लेती है। दिखाया ये जाता है कि उसकी सेक्सुअल डिजायर बाहर आने लगी है। लड़के साथ फोन पर सेक्स करती है लड़का और वो बुजुर्ग… मतलब दोनों अपने ही हाथों से कारनामे कर रहे हैं और गन्दा क्या बोलूँ…

और अंत में चारों ही बेइज्जत होती हैं अपने अपने पुरुषों द्वारा… सबसे मुझे तब लगता है जब जब उस बुजुर्ग औरत को बेटे घर से निकालते हैं। बहुएँ उसके सेक्सी नावल फाड़कर आँगन वाले चौराहे पर फेंकती हैं। उफ़्फ़! औरतों की क्या इमेज परोसी जा रही है… रात भर दिमाग में चिढ़ सी बनी रही…

ये है सशक्तिकरण?

क्या है ये ? आने वाली युवा पुरुष वाली पीढी की नजर में… सिर्फ वासना से ग्रस्त औरतें?  और ये फ़िल्म देख लड़के क्यों न शिकार ढूंढे। रॉंग नंबर लगा कर या फेसबुक पर फेक आई डी बना कर…

डाइरेक्ट पोर्न परोस रहे हैं। इस फिल्म में खुल्लमखुल्ला सेक्स परोसा गया है। नब्बे के दशक में भी अच्छी फिल्म बनती थी। अब पता नही क्या बनता है। समझ ही नही आया…

औरत के शराब और सिगरेट पीने, चोरी से रातों को घर से बाहर घूमने और बेहिचक शारीरिक सम्बन्ध बनाने को सशक्तिकरण का नाम दे दिया गया और लोग वाह-वाह करते हैं…

परसों ही एक फ़िल्म देखी। मजेदार, साफ-सुथरी, प्यार-रोमांस से भरी… शायद लोगो ने नाम भी न सुना हो। क्वीन मूवी में हीरो का रोल किया था जिसने- राजकुमार राव और कमल हासन की बेटी श्रुति हासन की जोड़ी थी। एक खूबसूरत फ़िल्म थी। जिसे एक बार नही दो बार या तीन बार देखने को जी चाहेगा। मोहल्लों में महकता इश्क़ कैसे परवान चढ़ता है। ये है स्टोरी… जो सच्ची और सुंदर है। कभी वक़्त मिले तो जरूर देखिए। फ़िल्म का नाम है- ‘बहन होगी तेरी’। नाम पर मत जाइयेगा फ़िल्म और फ़िल्म का काम देखिएगा।

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और दोनों की तुलना करके देखिएगा कि कौन सी फ़िल्म एक्चुअली थियेटर के लायक थी।

  • यह समीक्षा है मोनिका शर्मा की। वे मुंबई में रहती हैं। वे कविताएँ भी लिखती हैं। और गद्य की विधाओं में भी खुद को अभिव्यक्त करती रहती हैं। 
एक वैकल्पिक मीडिया जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है। जो स्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।

1 thought on “‘लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का’ में ये कैसा महिला सशक्तिकरण है?”

  1. 100000%% agree….aisi ghatiya movies dekhne se behtar hai porn dekh lijiye..bollywood me aaj ke daur me sirf aisi movie ban rhi isliye rape girl child kiddnaping badh rhi///

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