‘और मैं भी मेरा रंग के रंग में रंग गई’

Anuradha Jain at Mera Ranng Event

मेरा रंग के एक साल पर अनुराधा जैन

अक्सर देखा गया है कि लोगों में लाइमलाइट में आने की बड़ी होड़ रहती है। हर कोई कैमरे के सामने रहना चाहता है, कैमरे के पीछे रहकर बहुत ही कम लोग काम करते हैं।

‘मेरा रंग’ संस्था को एक साल हो गया है, इसी दौरान मैंने जाना कि शालिनी जी भी उन महिलाओं में से हैं जो अब तक कैमरे के पीछे खूब रही और चुपचाप काम करती रहीं। इसी का नतीजा है ‘मेरा रंग’ का एक साल होने की सफलता।

जब-जब लोग सफलता के कदम चूमते हैं उनके जीवन में चुनौतियां भी बढ़ती जाती हैं। कुछ उसी तरह शालिनी जी के सामने भी नई-नई चुनौतियां आने लगीं लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

रही मेरी बात, मैं शालिनी जी से पहली बार अपनी शादी में मिली। हां, उनके पति दिनेश श्रीनेत सर के साथ काम किया था। उनके साथ खूब उठना-बैठना था लेकिन मुझे ये अंदाजा नहीं था कि एक दिन शालिनी जी मेरी दोस्त बन जाएंगी।

मुझे जब पता चला कि उन्होंने ‘मेरा रंग’ प्रोग्राम शुरू किया है तो मैंने दिनेश सर और उन्हें बधाई देने के लिए कॉल किया। बस तभी से ही मैं उनसे जुड़ी।

कहते हैं ना बिहाइंड द कर्टेन, मेरा योगदान भी ‘मेरा रंग’ के लिए कुछ ऐसा ही था। जैसे की शालिनी जी अक्सर कहती हैं तुम नंबर देती हो तो मेरी हफ्तों की मेहनत बच जाती है। उनकी ये बात दिल को छू जाती है। लगता है कि जैसे मैं भी ‘मेरा रंग’ में रंग गई हूं।

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शालिनी जी को जानने के बाद तो जैसे मेरी और उनकी घंटो-घंटों बातें होने लगी। यहां तक की घर की छोटी-बड़ी बातें भी हम अक्सर फोन पर करते हैं। बेशक समय की कमी या अन्य कारणों से हम मिल नहीं पाते। लेकिन कभी ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि जैसे हम कभी मिले ही नहीं।

अंत में यही कहूंगी शालिनी जी, दिनेश जी, उनके दोनों सुपुत्रों और मेरा रंग की टीम को एक साल होने की खुशी में बहुत-बहुत बधाई।

  • अनुराधा जैन एन्टरटेनमेंट व लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं। ओनली माय हेल्थ, अमर उजाला से होते हुए अभी एबीपी न्यूज के ऑनलाइन संस्करण में कार्यरत।
एक वैकल्पिक मीडिया जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है। जो स्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।

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