देर-सबेर ये आग हमारे घर तक भी आएगी

Child abuse in India

बहुत पहले एक खबर पढ़ी थी। जिसमें एक औरत अपनी तीन महीने की अबोध बच्ची को नौकर के भरोसे छोड़ कर बगल वाले घर में आधे घंटे के लिए चली जाती है। बीच में कुछ सामान लेने के लिए वह घर वापस आती है तो नौकर को अपनी 3 महीने की बच्ची के ऊपर बैठा पाती है।

बिस्तर में ताजा खून पड़ा होता है बच्ची कोई हरकत नहीं कर रही थी… और वह नौकर अपना लिंग बची कि मुंह में डाले बैठा था। शायद योनि में ना घुसा पाने की वजह से उसने अपनी कामाग्नि रोती हुईं बच्ची के मुँह में डाल कर पूरी कर रहा था। वह बच्ची दम घुट जाने की वजह से मर चुकी थी। आज फिर एक डेढ़ साल की अबोध बच्ची के साथ बलात्कार की खबर ने उस पुरानी घटना की याद दिला दी।

हम कैसे माहोल में जीने लगे हैं? आदमी क्यों इतना वहशी होता जा रहा है? अब लोग क्यों नहीं कैंडिल मार्च निकालते? क्यों नहीं सड़कों को इंसानों से पाट देते? ये ऐसे पागल हैं जिनको समाज से खींचकर बाहर लाना चाहिए। आज किसी की बच्ची है कल किसी और की होगी… पर देर-सबेर ये आग हमारे घर तक भी आएगी।

हमें जहाँ चिल्लाना चाहिए, हम वही चुप लगा जाते हैं। और जहाँ बेवजह तूल नही देना चाहिए, वहीं बड़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

क्यों औरतों के शरीर में सिर्फ यही एक स्थान दिखाई देता है नर पिशाचों को? कुछ दिनों पहले 90 वर्ष की बुजुर्ग का रेप हुआ। फिर एक 70 साल की बुजुर्ग का। मतलब ऐसे रोगियों को उम्र से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें यथासंभव एक स्त्री योनि चाहिए। यदि नहीं मिल पाई तो फिर सिर्फ मादा से भी काम चला लेते हैं… गाय, बकरी, मुर्गी, कुतिया… और भी शायद बहुत कुछ।

इसे भी देखेंः  यौन शिक्षाः आप बात करके देखिये तो, सब आसान हो जाता है

ज़रा कल्पना करिए बच्ची की हालत… पहली बार में ही खून की धार के साथ और भी अंग लिंग के साथ बाहर आ गए होंगे। इतनी छोटी बच्ची न उसे मार सकती थी न रोक सकती थी न किसी को बुला सकती थी। बलात्कारी के हर बार ज़बरदस्ती करने पर शरीर के अंदर के अंग बाहर सरक आते रहे होगें। एक छोटी सी खबर भर बन कर किसी अखबार के पन्नों में दफन हो रद्दी बन जाती है। ऐसे विक्षिप्तों का एक मात्र इलाज है- अंग भंग। बाद में चलने दीजिए सालों साल मुकदमे…और लगने दीजिए तारीख पर तारीख।

ज़रा हिसाब लगाइए। हम कैसे माहौल में अपने जिगर के टुकड़ों को छोड़कर जा रहे हैं?? जहाँ नर पिशाच बन बैठा है और शिकार हमारे आपके बच्चे ही हैं।

  • पूनम लाल सोशल मीडिया पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक लेखनी के लिए जानी जाती हैं। यह आलेख हमने उनकी फेसबुक वॉल से लिया है।
एक वैकल्पिक मीडिया जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है। जो स्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।

Leave a Reply