चरित्रहीन औरत : पद्मा पाण्डेय की कविता

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औरत को चरित्रहीन
कहने वाले मर्दो को
देखा है, उन गलियों मे जाते हुए

जिस पर वो दाग लगाते है
देखा है, उन दागों को धुलवाते हुए

करते हैं जिन औरतों के
चरित्रहीन होने की बात
देखा है, उन मर्दो को
उनका चीरहरण करते हुए

जिस बदनाम
जिस्म को देखकर
तुम्हे उबकाई आती है
देखा है,
उस जिस्म को नोच-नोचकर
अपनी हवस मिटाते हुए

तुम सुधर जाओ,
तो कोई औरत
चरित्रहीन न होगी
उसकी कभी कोई
तौहीन न होगी

मत बनाओ
उसे बाजारू तुम
तो देखो,
उनकी आत्मा कभी
मलीन न होगी

गौर से देखो,
वो है तुम्हारी मां बेटी, बहन जैसी

दे दो उनको मान तुम
वो है बिल्कुल देवी जैसी!

  • यह कविता है पद्मा पाण्डेय की। वे लखनऊ में रहती हैं और सोशल मीडिया पर स्त्री के विभिन्न स्वरूपों को अपनी सुंदर कविताओं के जरिए अभिव्यक्त करती हैं 
एक वैकल्पिक मीडिया जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है। जो स्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।
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1 thought on “चरित्रहीन औरत : पद्मा पाण्डेय की कविता”

  1. मैं जुड़ना चाहता हूँ । क्या मेरी रचना प्रकाशित हो सकती है?

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