Author: जया यशदीप

तुम सिर्फ आँसूओं में तो नहीं…

तुम क्या गये, जीवन का आखरी पन्ना न्यूज-पेपर पर छपी एक्सिडेंट की खबर भर रह गया… घर भर-भर लोग आते रोते-चिल्लाते मैं डर से सहमे अपने बच्चों को देखकर कभी चुप होती कभी दुनिया...

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कला – एक औरत की अनकही कथा

तीस तक आते-आते उसने आठ बार गर्भधारण किया और पाँच की माँ बनी ! आँखों के नीचे जमे होते छुआरे से छिलके और दूध चूस कर स्तन सूखे लूफ्फा के स्पोंज बन गये साल...

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मुझमें जो भी अच्छा है सब तेरा है

जब तुम बाहर रहते हो… ऑफिस के काम से… तो और भी ज्यादा यह अहसास पुख्ता होता है कि तुमसे ही यह घर घर है। जरूरी नहीं कि यह बात सिर्फ स्त्री पर लागू...

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यौन शिक्षाः आप बात करके देखिये तो, सब आसान हो जाता है

चलिये, आज एक जरूरी बात करते हैं। मां के रूप में स्त्री की भूमिका के हर पहलू पर बात होती है, परन्तु जैसे जैसे तेजी से समय बदल रहा है और बच्चे प्री-टीन में ...

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