Category: हम भी हैं

क्या स्त्रीवादी पोर्न भी हो सकता है?

जन-विश्वासों के उलट कई विश्व-स्तरीय शोध यह बताते हैं कि संयत और शांत पोर्नोग्राफी का उपयोग प्रयोक्ता को हिंसक या लैंगिक भेदभाव करने वाला नहीं बनाता। टेक्सास टेक विश्वविद्यालय में वर्ष 2004 में प्रकाशित...

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पोर्न देखा जा रहा है, आप किसे दोष देंगे?

स्कूल, कॉलेज से लेकर संसद भवन तक छिप कर पोर्न देखा जा रहा है। तब आप दोष किसे देंगे ? सीधा अभिप्राय है कि जिस प्रवृत्ति को जितना दबाया जा रहा है, वह चोरी-छिपे...

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यह पोर्न क्या है और अश्लीलता क्या है?

वास्तव में भारतीय संस्कृति में कौमार्य का पवित्रता से ऐसा नाता जुड़ा है कि अपवित्र हो जाने के डर से विपरीत लिंग के प्रति शिक्षा व जानकारी तक से दुराव होने लगा, कि कहीं...

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भारतीय समाज का ‘पर्दादार’ होना अब केवल एक भ्रम है

पोर्न उद्योग के विस्फोटक विकास के सामाजिक कारणों और परिणामों पर विस्तार से विचार किया जाना चाहिए। कच्चा मन स्वयं के शरीर और विपरीत लिंग के विषय में अनेक प्रश्नों से भरा है, प्रश्न...

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दो घटनाएं और पोर्न की दुनिया से रू-ब-रू होना

बात पुरानी है, नई है, अपने समय में हर समय की है। सड़कें आमतौर पर किसी भी शहर का आईना होती हैं। जिन पर टहलते हुए उस समाज की नब्ज़ टटोली जा सकती है।...

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एक औरत के पास भी है फैंटेसी की दुनिया

‘लिपिस्टिक अंडर माइ बुर्का’ कैसी फिल्म है, मुझे मालूम नहीं! लेकिन इस फिल्म ने हमारा ध्यान कुछ ऐसी बातों की तरफ खींचा है, जो बेहद बुनियादी हैं, मगर उन्हें पुरूष प्रधान समाज मानना ही नहीं...

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जो रेप करता है सिर्फ वो नहीं आप भी अपराधी हैं!

हमारी कथनी और करनी में कितना अंतर है, इसका उदाहरण हम कुछ दिनों पहले दिल्ली में हुई रेप की घटना से देख सकते है। जहाँ हम 8 मार्च को महिलाओं के स्वावलंबी होने, उनकी हिम्मती होने...

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बस्ती में गई तो थी महिला दिवस पर बात करने, बात कहीं और पहुंच गई…

आठ मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। एक हफ्ते पहले से इसकी तैयारियां चल रही हैं और जगह जगह कार्यक्रम हो रहे हैं। गौर करने वाली बात ये है कि महिलाओं के अधिकार...

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बेटियां संपत्ति नहीं, जिस्म का हिस्सा होती हैं…

आइए पहले दान को समझ लें… दान किसी भी वस्तु या पदार्थ या संपत्ति का किया जा सकता है ना कि बेटियों का… क्योंकि बेटी संपत्ति नहीं हो सकती। दूसरा यदि आप किसी वस्तु...

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निहलानी जी, फीमेल फैंटेसी से इतनी घबराहट क्यों हुई आपको?

पहलाज निहलानी जी, ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ फिल्म को मुंबई फिल्म फ़ेस्टिवल में जेंडर इक्वेलिटी के लिए ‘ऑक्सफेम’ अवार्ड मिल चुका है। यानी कि हम यह मानकर चलें कि फिल्म कुछ लोगों की नज़रों...

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