Category: हम भी हैं

अच्छी लड़कियां गलतियाँ करके नहीं सीखतीं!

“मुझे सड़कों पर चाऊमीन और बिरयानी खाने वाली लड़कियां बहुत बुरी लगती हैं। सड़क पर खड़े होकर वह क्या दिखाना चाहती हैं कि हम भी ऐसे खा सकते हैं। अरे भई गोलगप्पे और टिक्की...

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ब्रा, पैंटी बोलने से नाटक रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर प्रतिरोध

“इसने मेरी ब्रा उठाके उनकी बालकनी में फेंक दी और उसपे शायरी भी लिख दी।” यह था डीयू के कमला नेहरू कॉलेज के नाटक ‘शाहिरा के नाम’ का वह डायलाग जिस पर हुई कंट्रोवर्सी...

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कृपया स्त्री के शरीर को रहस्य न बनाएं…

टीवी पर सेनेटरी नैपकिन का विज्ञापन आ रहा है और घर का प्रत्येक वयस्क सदस्य बगलें झाँक रहा है… बच्चे उत्सुकता से देख रहे हैं…। यह कोई नई बात नहीं है। जब से टीवी...

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लड़कियां शर्म छोड़ खुलकर बोलें छेड़खानी के खिलाफ

इलाहाबाद की एक छात्रा लोकल बस से सफर कर रही थी। हवा के ठंडे झोकों ने उसे नींद के आगोश में ढकेल दिया। ऐसा हम सबके साथ होता है। मैं स्वयं गाड़ी के भीतर बैठते...

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थर्ड जेंडर से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं

जब कभी किसी के परिवार में कोई खुशी का अवसर होता है, तो हम देखते हैं कि एक लैंगिक दृष्टि से विवादित समाज के लोग जो प्रायः हिजड़े (अथवा वर्तमान में प्रचलित नाम किन्नर;...

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प्रेगनेंसी, बाजार और दया

एक भाभी जब गर्भवती हुई, तब पूरे गर्भकाल आठवे महीने तक तैराकी, साइक्लिंग, ट्रेकिंग पर जाना करती थी । जब भतीजी पैदा हुई तो दर्द हुआ केवल 10 मिनट और डॉक्टर तक पहुंचने से...

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विकास के दावों पर थप्पड़ हैं भारत के ये रेड लाइट एरिया

भारत का नाम संस्कृति, सभ्यता और महिलाओ के सम्मान के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। जहाँ पर महिलाओ को देवी के रूप में पूजा जाता है। भारत में सभ्यता और संस्कृति के...

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आपने क्या सोचा कि मैं मर जाऊंगी?

कुछ साल पहले सीमा बिस्वास का एक नाटक देखने को मिला था। रबीन्द्रनाथ रचित स्त्री पात्र केंद्रित नाटक ‘स्त्रीर पत्र‘ समाज में स्त्रियों की दयनीय स्थिति को बयां कर रहा था। एक स्त्री के...

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यौन शिक्षाः आप बात करके देखिये तो, सब आसान हो जाता है

चलिये, आज एक जरूरी बात करते हैं। मां के रूप में स्त्री की भूमिका के हर पहलू पर बात होती है, परन्तु जैसे जैसे तेजी से समय बदल रहा है और बच्चे प्री-टीन में ...

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