मुझको यौम-ए-मुहब्बत जैसे किसी दिन की याद नहीं

आज वैलेंटाइन डे है। मोहब्बत के इज़हार का दिन। अपना मुल्क अफ़ग़ानिस्तान छोड़ा तो उम्र काफ़ी कम थी। यौम-ए-मुहब्बत जैसे किसी दिन की याद...

देह जो नदी बन चुकी…

एक लंबी कविता... जो रेड लाइट एरिया की बेबस और बदरंग जिंदगी को बयान करती  है।  (1) भूख से बेदम, किसी सड़क ने पिघलते...

हां, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं !

हां मुझे भी चरित्रहीन औरतें पसंद हैं... बेहद... बेहद.. खूबसूरत होतीं है वो। बेबाक, बेपर्दा, स्वतंत्र और उनमुक्त... कि उनका कोई चरित्र नहीं होता।...