सुनो सखा…!

अब वो कसावट नही रही मेरे स्तनों में, वो लाल गाल भी चमक खोने लगे, आंखों में पहले सा तेज नही रहा, पेट का...

चरित्रहीन

जब पहली बार तुमने मुझे बीस मिनट तक चूमा और उस बेहतरीन फ्रेंच किस के बाद तुमने हँस कर कहा कि तुम तो मुझसे...

देह की धुरी

जब फ़िकरे कसते हो औरत की देह की बनावट पे तो आग सी लग जाती है विद्रोह जग जाता है, जब तुम को घूरते...

लड़कियाँ गौरैया होती है

लड़कियाँ गौरैया होती है फुदकती हैं एक डाल से दुसरी डाल तक मुस्कुराती हैं अपने टेढ़े मेढ़े दांतो से पकड़ लेती हैं अपनी चोंच...

देह जो नदी बन चुकी…

एक लंबी कविता... जो रेड लाइट एरिया की बेबस और बदरंग जिंदगी को बयान करती  है।  (1) भूख से बेदम, किसी सड़क ने पिघलते...