Tagged: women empowerment

एक औरत के पास भी है फैंटेसी की दुनिया

‘लिपिस्टिक अंडर माइ बुर्का’ कैसी फिल्म है, मुझे मालूम नहीं! लेकिन इस फिल्म ने हमारा ध्यान कुछ ऐसी बातों की तरफ खींचा है, जो बेहद बुनियादी हैं, मगर उन्हें पुरूष प्रधान समाज मानना ही नहीं...

More

बस्ती में गई तो थी महिला दिवस पर बात करने, बात कहीं और पहुंच गई…

आठ मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। एक हफ्ते पहले से इसकी तैयारियां चल रही हैं और जगह जगह कार्यक्रम हो रहे हैं। गौर करने वाली बात ये है कि महिलाओं के अधिकार...

More

बेटियां संपत्ति नहीं, जिस्म का हिस्सा होती हैं…

आइए पहले दान को समझ लें… दान किसी भी वस्तु या पदार्थ या संपत्ति का किया जा सकता है ना कि बेटियों का… क्योंकि बेटी संपत्ति नहीं हो सकती। दूसरा यदि आप किसी वस्तु...

More

निहलानी जी, फीमेल फैंटेसी से इतनी घबराहट क्यों हुई आपको?

पहलाज निहलानी जी, ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ फिल्म को मुंबई फिल्म फ़ेस्टिवल में जेंडर इक्वेलिटी के लिए ‘ऑक्सफेम’ अवार्ड मिल चुका है। यानी कि हम यह मानकर चलें कि फिल्म कुछ लोगों की नज़रों...

More

ब्रा, पैंटी बोलने से नाटक रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर प्रतिरोध

“इसने मेरी ब्रा उठाके उनकी बालकनी में फेंक दी और उसपे शायरी भी लिख दी।” यह था डीयू के कमला नेहरू कॉलेज के नाटक ‘शाहिरा के नाम’ का वह डायलाग जिस पर हुई कंट्रोवर्सी...

More

हँसने का यह मतलब नहीं कि हमारे साथ बदतमीजी की जाए!

बैंगलोर में हुई शर्मनाक घटना का कलंक हमारी सोसाइटी से शायद इतनी जल्दी न मिटे, मगर यह भी सच है कि धीरे-धीरे करके लोग उसे भूल ही जाएंगे। मगर जब भी हम इसे याद...

More

आपने क्या सोचा कि मैं मर जाऊंगी?

कुछ साल पहले सीमा बिस्वास का एक नाटक देखने को मिला था। रबीन्द्रनाथ रचित स्त्री पात्र केंद्रित नाटक ‘स्त्रीर पत्र‘ समाज में स्त्रियों की दयनीय स्थिति को बयां कर रहा था। एक स्त्री के...

More